
🔹 बाजार की मौजूदा स्थिति
सोमवार (13 अक्टूबर 2025) को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर संकेतों के साथ हुई। GIFT Nifty 65,800 के स्तर के करीब कारोबार करता दिखा, जो पिछले सत्र से लगभग 90 अंक नीचे रहा। इसका सीधा असर Sensex और Nifty 50 दोनों पर देखने को मिला।
🔹 वैश्विक बाजारों का दबाव
अमेरिकी और एशियाई बाजारों में गिरावट का सिलसिला जारी है। अमेरिका में Dow Jones और Nasdaq Composite क्रमशः 0.4% और 0.7% गिरे।
इस गिरावट का कारण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा है, जिससे वैश्विक व्यापार माहौल में तनाव बढ़ गया है।
🔹 ट्रंप टैरिफ का असर
ट्रंप की इस नई नीति के तहत चीन से आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। इससे एशियाई बाजारों में बिकवाली देखी गई, जबकि डॉलर इंडेक्स में मजबूती और गोल्ड प्राइस में हल्की बढ़ोतरी हुई।
भारतीय निवेशकों को डर है कि यह नीति भारतीय निर्यात कंपनियों पर भी अप्रत्यक्ष असर डाल सकती है।
🔹 सोने और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
Gold Futures में सोमवार को हल्की तेजी देखी गई, जो 0.2% बढ़कर ₹71,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंची। वहीं, Brent Crude Oil की कीमतें $86 प्रति बैरल के करीब स्थिर बनी रहीं।
यह स्थिति बताती है कि निवेशक फिलहाल इक्विटी मार्केट से हटकर सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
🔹 घरेलू संकेतक और सेक्टोरल अपडेट
भारतीय बाजार में बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर पर दबाव देखने को मिला, जबकि FMCG और फार्मा शेयरों में हल्की रिकवरी हुई।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में फिलहाल Profit Booking Phase जारी है और आने वाले दिनों में Inflation Data और Q2 Earnings Results पर निवेशकों की नजर रहेगी।
🔹 विदेशी निवेशकों (FIIs) का मूड
Foreign Institutional Investors (FIIs) ने पिछले सत्र में करीब ₹1,200 करोड़ की बिकवाली की है। वहीं, Domestic Institutional Investors (DIIs) ने लगभग ₹900 करोड़ की खरीदारी से संतुलन बनाने की कोशिश की।
इससे पता चलता है कि विदेशी निवेशक फिलहाल वैश्विक जोखिमों को देखते हुए सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
🔹 रुपया और बांड मार्केट
भारतीय रुपया सोमवार को 5 पैसे कमजोर होकर 83.29 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। वहीं, 10-Year Government Bond Yield 7.25% के आसपास स्थिर रही।
कमजोर रुपया और स्थिर यील्ड यह दर्शाता है कि विदेशी प्रवाह पर दबाव बना हुआ है।
🔹 इस हफ्ते के प्रमुख ट्रिगर
- US CPI Data: मुद्रास्फीति के आंकड़े फेडरल रिजर्व के अगले रुख पर असर डाल सकते हैं।
- India Q2 Results: आईटी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के तिमाही नतीजे इस सप्ताह घोषित होंगे।
- Crude Oil Movement: पश्चिम एशिया के तनाव से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
- FIIs Flows: विदेशी निवेशक फिलहाल ग्लोबल अनिश्चितता के चलते सतर्क हैं।
🔹 विशेषज्ञों की राय
HDFC Securities के मार्केट एनालिस्ट के अनुसार, “अगर Nifty 50 का स्तर 25,000 के नीचे जाता है तो शॉर्ट-टर्म वीकनेस और बढ़ सकती है। हालांकि, बैंकिंग और फार्मा सेक्टर में लॉन्ग पोजीशन बनाना फायदेमंद रह सकता है।”
🔹 निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार इस समय वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच फंसा हुआ है। GIFT Nifty में गिरावट, ट्रंप की टैरिफ नीति और एशियाई बाजारों की कमजोरी मिलकर घरेलू निवेशकों के भरोसे को परख रहे हैं।
हालांकि, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से भारतीय बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत है और हर गिरावट लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए अवसर हो सकती है।
🔹 डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी किसी निवेश सलाह के रूप में न लें। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
References:
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