नवीन भारतीय eyewear कंपनी Lenskart को SEBI से IPO (Initial Public Offering) की मंज़ूरी मिल गई है। इस मंजूरी ने निवेशकों और बाज़ार में उत्साह बना दिया है। लेंसकार्ट अपनी जनता-भागीदारी की राह पर आगे बढ़ने की तैयारियों में है। इस लेख में हम इस IPO से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बिंदु, संभावनाएँ और जोखिमों को सरल एवं संक्षिप्त रूप में देखेंगे।
IPO की मंज़ूरी और प्रमुख आंकड़े
- SEBI ने Lenskart की ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को मंज़ूरी दी है, जिससे कंपनी अब सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) जारी कर सकती है।
- कंपनी इस IPO में ₹2,150 करोड़ की ताज़ा पूंजी (fresh issue) जुटाने की योजना बना रही है।
- इसके अलावा, मौजूदा निवेशक और प्रमोटर कुल 13.22 करोड़ (132.2 मिलियन) शेयरों को OFS (Offer For Sale) के तहत बेचेंगे।
- कुल IPO का अनुमानित आकार ₹7,500 – 8,000 करोड़ तक हो सकता है, इस संख्या में OFS और Fresh Issue दोनों शामिल हैं।
- कंपनी की लक्ष्य है मध्य-नवंबर 2025 में स्टॉक बाज़ार में सूचीबद्ध होना।
IPO उपयोग: पैसे कहां जाएंगे?
- CoCo स्टोर विस्तार: नए company-owned, company-operated (CoCo) स्टोर खोलने के लिए ₹272.6 करोड़ खर्च होंगे।
- लीज़, किराया और लाइसेंस खर्चों में ₹591.4 करोड़ का उपयोग होगा।
- टेक्नोलॉजी व क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में ₹213.38 करोड़ निवेश किया जाएगा।
- ब्रांड मार्केटिंग और प्रचार के लिए ₹320.06 करोड़ की व्यवस्था।
- शेष राशि सामान्य कॉर्पोरेट ज़रूरतों (corporate and working capital) में खर्च की जाएगी।
वित्तीय प्रदर्शन और बदलाव
- वित्त वर्ष 2025 में Lenskart ने ₹297 करोड़ का लाभ (net profit) दर्ज किया, जबकि पिछले वर्ष में कंपनी को ₹10 करोड़ का नुकसान हुआ था।
- राजस्व (revenue) में भी बढ़ोतरी हुई है: FY2025 में यह लगभग ₹6,625 करोड़ तक पहुँच गया, जबकि FY2024 में यह ₹5,428 करोड़ था।EBITDA मार्जिन (मूल ऑपरेटिंग मुनाफे का अनुपात) भी सुधरा है, जो पहले निम्न स्तर पर था।
- Lenskart ने मई 2025 में अपनी स्थिति को Private → Public Limited Company में बदला, ताकि IPO प्रक्रिया सुगम हो सके।
संभावनाएँ और जोखिम
संभावनाएँ
- मजबूत बाजार पकड़: Lenskart भारत और विदेशों में बड़ी संख्या में शो रूम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म संचालित करता है।
- दृढ निवेशकों का समर्थन: SoftBank, Temasek, Kedaara, Alpha Wave जैसे बड़े निवेशकों ने Lenskart में पहले निवेश किया है।
- डिजिटल + ऑफलाइन मॉडल: कंपनी ऑनलाइन बिक्री के साथ-साथ ऑफ़लाइन CoCo और फ्रैंचाइज़ी स्टोर मॉडल में भी काम करती है। इससे विविधता और मजबूती मिलती है।
- उद्योग वृद्धि की उम्मीद: भारत की eyewear (दृष्टि सुधार चश्मे) मार्केट को आने वाले वर्षों में तेज़ी से बढ़ने की संभावना है।
जोखिम
- IPO के लाभ और सूचिबद्ध मूल्य (listing price) बाज़ार की स्थिति पर निर्भर होंगे।
- यदि कंपनी योजनाओं के अनुसार स्टोर विस्तार या टेक्नोलॉजी निवेश नहीं कर पाए, तो दबाव बढ़ सकता है।
- OFS के कारण प्रमोटर या बड़े निवेशक हिस्से बेच सकते हैं, जिससे शेयर की आपूर्ति बढ़ सकती है।
- एक ख़ास विवाद: DRHP में खुलासा हुआ है कि सह-संस्थापक Sumeet Kapahi को अपना Delhi University B.Com (Hons.) डिग्री और मार्कशीट्स नहीं मिल पाए हैं — इस बात को कंपनी ने “उपासना कारण जोखिम” (risk factor) में शामिल किया है।
निष्कर्ष
Lenskart का IPO मंज़ूर होना न सिर्फ कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि भारत के उबरते हुए स्टार्टअप और उपभोक्ता-तकनीकी (consumer-tech) क्षेत्र के लिए भी यह एक साहसिक कदम है। ₹2,150 करोड़ की ताज़ा पूंजी और बड़े पैमाने पर OFS का मिलाजुला प्रस्ताव इसे 2025 की प्रमुख सार्वजनिक प्रस्तावों में से एक बनाता है।
हालाँकि, निवेशकों को लाभ और जोखिम दोनों को सावधानी से देखना होगा। IPO सफल हो सकती है, लेकिन बाज़ार की उतार-चढ़ाव, निष्पादन की क्षमता और समय पर वृद्धि ही इसकी सफलता तय करेंगी।
डिस्क्लेमर
यह लेख सार्वजनिक स्रोतों जैसे कि समाचार माध्यमों और वित्तीय रिपोर्टों पर आधारित है। लेख में दी गई जानकारी समय, रिपोर्टिंग और स्रोतों पर निर्भर करती है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले कृपया विशेषज्ञ सलाह लें। इस लेख या उसकी जानकारी के कारण किसी भी हानि की जिम्मेदारी लेखक या प्रकाशक स्वीकार नहीं करेंगे।
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